फिलिस्तीन में जहाँ एक तरफ इस्राईल आम लोगों के जनसनहार में अब तक 30 हज़ार से अधिक लोगों का क़त्ले आम कर चुका है वहीँ अब युद्ध के साथ साथ भोजन पानी की कमी, कुपोषण और इलाज के अभाव में हर दिन कम से कम 63 महिलाओं को जान गंवानी पड़ रही है।
फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण की महिला मामलों की मंत्री आमाल हम्द ने कहा है कि फ़िलिस्तीनी महिलाओं को अभूतपूर्व चुनौतियों और समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि हम हर दिन अकेले ग़ज़्ज़ा पट्टी में 63 फिलिस्तीनी महिलाओं को शहीद होते देखते हैं, और हर घंटे तीन फिलिस्तीनी महिलाएं शहीद हो रही हैं। फ़िलिस्तीनी महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी हमले, ग़ज़्ज़ा पट्टी में नरसंहार और फिलिस्तीनियों का जातीय सफाया एक सोची समझी साज़िश योजनाबद्ध षड्यंत्र है।
हम्द ने स्पष्ट किया कि जब दुनिया भर की महिलाएं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना रही हैं, फिलिस्तीनी महिलाएं मृतकों और घायलों के बीच मरने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। यह मौत या तो हवाई हमलों के कारण है अगर उस से बच गई तो भूख-प्यास या बीमारी के कारण।
हम्द ने कहा कि ग़ज़्ज़ा पट्टी में 60,000 गर्भवती महिलाएं ऐसी स्थिति में बच्चे को जन्म देने की कगार पर हैं जहां उनके पास कोई चिकित्सा उपकरण या एनेस्थेटिक्स भी नहीं है।
हम्द ने कहा फिलिस्तीनी महिलाओं के खिलाफ ज़ायोनी हमले केवल ग़ज़्ज़ा पट्टी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वेस्ट बैंक और मक़बूज़ा क़ुद्स में भी महिलाऐं ज़ायोनी हमलों का निशाना बन रही हैं।